Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.156.154-155h: हे भरतश्रेष्ठ! घटोत्कच की आँखें क्रोध से फिर घूमने लगीं। उसने हाथ मलकर, होंठ चबाकर, क्रोधपूर्वक सारथि से कहा - 'सूत! मुझे द्रोणपुत्र के पास ले चलो।'॥154 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे भरतश्रेष्ठ! घटोत्कच की आँखें क्रोध से फिर घूमने लगीं। उसने हाथ मलकर, होंठ चबाकर, क्रोधपूर्वक सारथि से कहा - 'सूत! मुझे द्रोणपुत्र के पास ले चलो।'॥154 1/2॥
O best of the Bharatas! Ghatotkacha's eyes started rolling with anger once again. He rubbed his hands and bit his lips and angrily said to the charioteer - 'Suta! Take me to Drona's son'॥ 154 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥