Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.156.152-153: हे भरतपुत्र! पाण्डव पक्ष के हजारों राजाओं में से वीर एवं शक्तिशाली राक्षसराज घटोत्कच के अतिरिक्त कोई भी अश्वत्थामा की ओर देख भी नहीं सकता था, जो विषैले सर्पों के समान भयंकर बाणों द्वारा पाण्डव सेनाओं को जला रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 152-153
 
 
श्लोक  7.156.152-153 
तं दहन्तमनीकानि शरैराशीविषोपमै:।
तेषु राजसहस्रेषु पाण्डवेयेषु भारत॥ १५२॥
नैनं निरीक्षितुं कश्चिदशक्नोद् द्रौणिमाहवे।
ऋते घटोत्कचाद् वीराद् राक्षसेन्द्रान्महाबलात्॥ १५३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतपुत्र! पाण्डव पक्ष के हजारों राजाओं में से वीर एवं शक्तिशाली राक्षसराज घटोत्कच के अतिरिक्त कोई भी अश्वत्थामा की ओर देख भी नहीं सकता था, जो विषैले सर्पों के समान भयंकर बाणों द्वारा पाण्डव सेनाओं को जला रहा था।
 
O son of Bharata! Among the thousands of kings on the Pandava side, no one except the valiant and powerful demon king Ghatotkacha could even look at Ashwatthama who was burning the Pandava armies with his fierce arrows, which were like poisonous serpents.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)