Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.156.151: जिस प्रकार प्रलयकाल में संवर्तक अग्नि समस्त प्राणियों को जला डालती है, उसी प्रकार अश्वत्थामा उस दैत्य सेना का संहार करके युद्धभूमि में अत्यन्त यशस्वी हुआ। | mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स हत्वा राक्षसानीकं रराज द्रौणिराहवे।
युगान्ते सर्वभूतानि संवर्तक इवानल:॥ १५१॥
अनुवाद
जिस प्रकार प्रलयकाल में संवर्तक अग्नि समस्त प्राणियों को जला डालती है, उसी प्रकार अश्वत्थामा उस दैत्य सेना का संहार करके युद्धभूमि में अत्यन्त यशस्वी हुआ।
Just as the Samvartaka fire burns all the living beings in the time of doomsday, in the same way Ashwatthama became very famous in the battlefield by killing that army of demons.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥