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mahabharat 7.156.147: उन बाणों से इतना पीड़ित होकर चौड़ी छाती वाले राक्षसों का वह समूह सिंहों द्वारा उत्पीड़ित उन्मत्त हाथियों के समूह के समान प्रतीत होने लगा। 147.   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 147
 
 
श्लोक  7.156.147 
तद्‍बाणैरर्दितं यूथं रक्षसां पीनवक्षसाम्।
सिंहैरिव बभौ मत्तं गजानामाकुलं कुलम्॥ १४७॥
 
 
अनुवाद
उन बाणों से इतना पीड़ित होकर चौड़ी छाती वाले राक्षसों का वह समूह सिंहों द्वारा उत्पीड़ित उन्मत्त हाथियों के समूह के समान प्रतीत होने लगा। 147.
 
So much tormented by those arrows that group of broad-chested Rakshasas began to look like a herd of maddened elephants ruffled by lions. 147.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)