Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.156.138-140h: घटोत्कच की आज्ञा स्वीकार करके वे भयंकर राक्षस, जिनके विशाल मुख, भयंकर रूप, फटे हुए मुख और डरावनी जीभें थीं, क्रोध से लाल हो चुके नेत्र, अपनी भीषण गर्जना से पृथ्वी को गुंजायमान करते हुए, हाथों में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र लेकर अश्वत्थामा को मार डालने के लिए उस पर टूट पड़े। | mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
घटोत्कच की आज्ञा स्वीकार करके वे भयंकर राक्षस, जिनके विशाल मुख, भयंकर रूप, फटे हुए मुख और डरावनी जीभें थीं, क्रोध से लाल हो चुके नेत्र, अपनी भीषण गर्जना से पृथ्वी को गुंजायमान करते हुए, हाथों में नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र लेकर अश्वत्थामा को मार डालने के लिए उस पर टूट पड़े।
Accepting Ghatotkacha's command, those horrible demons with huge faces, fierce forms, with gapping mouths and frightening tongues, their eyes turning red with anger, making the earth resonate with their loud roars, and with various weapons in their hands, attacked Ashvatthama to kill him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥