Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.156.131: तब द्रोणपुत्र ने भार वहन करने में समर्थ दूसरा विशाल धनुष हाथ में लिया और तीखे बाणों की वर्षा करने लगे, जैसे बादल जल की धारा बहाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 131
 
 
श्लोक  7.156.131 
ततोऽन्यद् द्रौणिरादाय धनुर्भारसहं महत्।
ववर्ष विशिखांस्तीक्ष्णान् वारिधारा इवाम्बुद:॥ १३१॥
 
 
अनुवाद
तब द्रोणपुत्र ने भार वहन करने में समर्थ दूसरा विशाल धनुष हाथ में लिया और तीखे बाणों की वर्षा करने लगे, जैसे बादल जल की धारा बहाते हैं।
 
Then Drona's son took in his hand another huge bow, capable of bearing the load, and began to shower sharp arrows, just as a cloud pours down a torrent of water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)