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mahabharat 7.156.128: उस समय घटोत्कच ने अत्यन्त क्रोधित होकर विष और अग्नि के समान भयंकर दस प्रबल बाण कृपीपुत्र अश्वत्थामा की छाती में मारे।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  7.156.128 
ततो घटोत्कचो बाणैर्दशभिर्गौतमीसुतम्।
जघानोरसि संक्रुद्धो विषाग्निप्रतिमैर्दृढै:॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
उस समय घटोत्कच ने अत्यन्त क्रोधित होकर विष और अग्नि के समान भयंकर दस प्रबल बाण कृपीपुत्र अश्वत्थामा की छाती में मारे।
 
At that time Ghatotkacha became very angry and struck ten strong arrows, which were as dangerous as poison and fire, deep into the chest of Kripi's son Ashwatthama.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)