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mahabharat 7.156.124: ‘चाचा! जैसे देवराज इन्द्र राक्षसों का संहार करते हैं, वैसे ही आप भीमसेन, नकुल, सहदेव और धर्मराज युधिष्ठिर का संहार करें। मेरी विजय की आशा आप पर ही है॥124॥   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  7.156.124 
जहि भीमं यमौ चोभौ धर्मराजं च मातुल।
असुरानिव देवेन्द्रो जयाशा मे त्वयि स्थिता॥ १२४॥
 
 
अनुवाद
‘चाचा! जैसे देवराज इन्द्र राक्षसों का संहार करते हैं, वैसे ही आप भीमसेन, नकुल, सहदेव और धर्मराज युधिष्ठिर का संहार करें। मेरी विजय की आशा आप पर ही है॥124॥
 
‘Uncle! Just as Devraj Indra kills the demons, in the same way you kill Bhimasena, Nakula, Sahadeva and Dharmaraja Yudhishthira. My hope of victory depends on you.॥ 124॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)