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mahabharat 7.156.117: महाराज! मैं आपके शत्रुओं का संहार करूँगा, आप पराजित नहीं हो सकते; इसके लिए मैं आपसे सच्ची शपथ लेता हूँ। आप अपनी सेना को आश्वस्त करें।'   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  7.156.117 
निहनिष्याम्यमित्रांस्ते न तवास्ति पराजय:।
सत्यं ते प्रतिजानामि पर्याश्वासय वाहिनीम्॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! मैं आपके शत्रुओं का संहार करूँगा, आप पराजित नहीं हो सकते; इसके लिए मैं आपसे सच्ची शपथ लेता हूँ। आप अपनी सेना को आश्वस्त करें।'
 
King! I will kill your enemies, you cannot be defeated; for this I take a true oath to you. You assure your army.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)