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mahabharat 7.156.110: पुरुषों में श्रेष्ठ अश्वत्थामा ने अपने बाणों से सम्पूर्ण दिशाओं को आच्छादित कर दिया तथा शत्रु पक्ष के एक लाख रथियों को मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  7.156.110 
स मार्गणगणैर्द्रौणिर्दिश: प्रच्छाद्य सर्वश:।
शतं रथसहस्राणां जघान द्विपदां वर:॥ ११०॥
 
 
अनुवाद
पुरुषों में श्रेष्ठ अश्वत्थामा ने अपने बाणों से सम्पूर्ण दिशाओं को आच्छादित कर दिया तथा शत्रु पक्ष के एक लाख रथियों को मार डाला।
 
Ashvatthama, the best among men, covered all directions with his arrows and killed one lakh charioteers of the enemy side. 110
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)