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mahabharat 7.156.11: कौरवेय! आपसे या किसी अन्य से युद्ध करते समय मेरे मन में किसी भी प्रकार का भय नहीं रहेगा।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.156.11 
कौरवेय न मे त्रास: कथंचिदपि विद्यते।
त्वया सार्धमथान्यैश्च युध्यतो हृदि कश्चन॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कौरवेय! आपसे या किसी अन्य से युद्ध करते समय मेरे मन में किसी भी प्रकार का भय नहीं रहेगा।
 
Kaurveya! There will be no fear in my heart whatsoever while fighting with you or anyone else.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)