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mahabharat 7.156.109: तब अस्त्र-शस्त्र के विशेषज्ञों में श्रेष्ठ द्रोणपुत्र ने वायव्यास्त्र का निशाना साधकर वहाँ प्रकट हुए नीले बादल को नष्ट कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 156: सोमदत्त और सात्यकिका युद्ध, सोमदत्तकी पराजय, घटोत्कच और अश्वत्थामाका युद्ध और अश्वत्थामाद्वारा घटोत्कचके पुत्रका, एक अक्षौहिणी राक्षस-सेनाका तथा द्रुपदपुत्रोंका वध एवं पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  7.156.109 
अथ संधाय वायव्यमस्त्रमस्त्रविदां वर:।
व्यधमद् द्रोणतनयो नीलमेघं समुत्थितम्॥ १०९॥
 
 
अनुवाद
तब अस्त्र-शस्त्र के विशेषज्ञों में श्रेष्ठ द्रोणपुत्र ने वायव्यास्त्र का निशाना साधकर वहाँ प्रकट हुए नीले बादल को नष्ट कर दिया।
 
Then Drona's son, the best among the experts of weapons, aimed the Vayavyastra and destroyed the blue cloud that had appeared there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)