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mahabharat 7.155.8: रात्रि के समय जब सभी योद्धा और महारथी एकत्र होकर परस्पर युद्ध कर रहे थे और भिन्न-भिन्न सेनाएँ मंथन कर रही थीं, तब तुममें से कौन बुद्धिमान पुरुष अपने होश में रहा? ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.155.8 
सर्वेषु योधेषु च संगतेषु
रात्रौ समेतेषु महारथेषु।
संलोडॺमानेषु पृथग्बलेषु
के वस्तदानीं मतिमन्त आसन्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
रात्रि के समय जब सभी योद्धा और महारथी एकत्र होकर परस्पर युद्ध कर रहे थे और भिन्न-भिन्न सेनाएँ मंथन कर रही थीं, तब तुममें से कौन बुद्धिमान पुरुष अपने होश में रहा? ॥8॥
 
At night, when all the warriors and great warriors were gathered together and fighting with each other and the different armies were churning, which of you wise men remained in your senses? ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)