Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.155.46: उत्तम ! तब घोर अंधकार से आवृत उस भयंकर प्रदोषकाल में उन महामनस्वी वीरों का अत्यंत भयंकर, भयानक और अद्भुत युद्ध आरम्भ हुआ, जो भेड़ियों, गीधों और कौओं को हर्षित करने वाला था ॥46॥ | mahabharat अध्याय 7.155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उत्तम ! तब घोर अंधकार से आवृत उस भयंकर प्रदोषकाल में उन महामनस्वी वीरों का अत्यंत भयंकर, भयानक और अद्भुत युद्ध आरम्भ हुआ, जो भेड़ियों, गीधों और कौओं को हर्षित करने वाला था ॥46॥
The best! Then, in the dreadful Pradoshkaal, covered with dense darkness, a very fierce, terrifying and wonderful war of those great-minded heroes, which brought joy to the wolves, vultures and crows, began. 46॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे भीमपराक्रमे पञ्चपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धके प्रसंगमें भीमसेनका
पराक्रमविषयक एक सौ पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५५॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ४७ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥