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mahabharat 7.155.45: तत्पश्चात् वरुण के पुत्रों के समान पराक्रमी आपके समस्त पुत्र क्रोध में भरे हुए तथा युद्ध की इच्छा से भरे हुए, महागुरु द्रोणाचार्य के साथ रथ, पैदल और हाथियों की सेना लेकर आये और वहाँ खड़े होकर भीमसेन को चारों ओर से बड़ी शक्ति से घेर लिया।   |   mahabharat अध्याय 7.155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.155.45 
तत: सुतास्ते वरुणात्मजोपमा
रुषान्विता: सह गुरुणा महात्मना।
वृकोदरं सरथपदातिकुञ्जरा
युयुत्सवो भृशमभिपर्यवारयन्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वरुण के पुत्रों के समान पराक्रमी आपके समस्त पुत्र क्रोध में भरे हुए तथा युद्ध की इच्छा से भरे हुए, महागुरु द्रोणाचार्य के साथ रथ, पैदल और हाथियों की सेना लेकर आये और वहाँ खड़े होकर भीमसेन को चारों ओर से बड़ी शक्ति से घेर लिया।
 
After this, all your sons, as valiant as the sons of Varuna, filled with anger and desirous of war, came along with the great Guru Dronacharya, along with their armies of chariots, infantry and elephants, and stood there, surrounding Bhimasena from all sides with great force.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)