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mahabharat 7.155.32-33: प्रजानाथ! यमराज के समान महान् भुजाओं वाले और क्रोध में भरे हुए भीमसेन को शत्रु का वध करने की इच्छा से आगे आते देख आपके पराक्रमी पुत्रों ने बाणों की भारी वर्षा से उन्हें ढककर रोक दिया॥32-33॥   |   mahabharat अध्याय 7.155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  7.155.32-33 
तमायान्तं जिघांसन्तं भीमं क्रुद्धमिवान्तकम्॥ ३२॥
न्यवारयन् महाबाहुं तव पुत्रा विशाम्पते।
महता शरवर्षेण च्छादयन्तो महारथा:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! यमराज के समान महान् भुजाओं वाले और क्रोध में भरे हुए भीमसेन को शत्रु का वध करने की इच्छा से आगे आते देख आपके पराक्रमी पुत्रों ने बाणों की भारी वर्षा से उन्हें ढककर रोक दिया॥32-33॥
 
Prajanath! Seeing Bhimasena, full of anger and having great arms like Yamraj, coming forward with the desire to kill the enemy, your mighty sons stopped him by covering him with a heavy shower of arrows. 32-33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)