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mahabharat 7.155.3-4: जब सिंधुराज जयद्रथ और पराक्रमी भूरिश्रवा का वध करके अपराजित वीर एवं पराक्रमी द्रोणाचार्य पांचाल सेना में आए, तब शत्रुओं को संताप देने वाले उस महाबली योद्धा के सेना में प्रवेश करने पर दुर्योधन ने अवसरानुसार क्या कार्य करना उचित समझा? ॥3-4॥   |   mahabharat अध्याय 7.155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  7.155.3-4 
निहते सैन्धवे वीरे भूरिश्रवसि चैव ह।
यदाभ्यगान्महातेजा: पञ्चालानपराजित:॥ ३॥
किममन्यत दुर्धर्षे प्रविष्टे शत्रुतापने।
दुर्योधनस्तु किं कृत्यं प्राप्तकालममन्यत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जब सिंधुराज जयद्रथ और पराक्रमी भूरिश्रवा का वध करके अपराजित वीर एवं पराक्रमी द्रोणाचार्य पांचाल सेना में आए, तब शत्रुओं को संताप देने वाले उस महाबली योद्धा के सेना में प्रवेश करने पर दुर्योधन ने अवसरानुसार क्या कार्य करना उचित समझा? ॥3-4॥
 
When the undefeated heroic and mighty Dronacharya entered the Panchala army after the slaying of Jayadratha, the king of Sindhus and the valiant Bhurishrava, what action did Duryodhana approve of as per the occasion when that fierce warrior who was causing torment to the enemies entered the army? ॥3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)