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mahabharat 7.155.2: जब अपार आत्मविश्वास से युक्त द्रोणाचार्य गुरुजनों की आज्ञा का उल्लंघन करने वाले मेरे पुत्र दुर्योधन से उपर्युक्त वचन कहकर शत्रु सेना में घुस गए, तब कुन्तीपुत्र अर्जुन ने क्या किया?॥2॥   |   mahabharat अध्याय 7.155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.155.2 
दुर्योधनं तथा पुत्रमुक्त्वा शास्त्रातिगं मम।
यत् प्राविशदमेयात्मा किं पार्थ: प्रत्यपद्यत॥ २॥
 
 
अनुवाद
जब अपार आत्मविश्वास से युक्त द्रोणाचार्य गुरुजनों की आज्ञा का उल्लंघन करने वाले मेरे पुत्र दुर्योधन से उपर्युक्त वचन कहकर शत्रु सेना में घुस गए, तब कुन्तीपुत्र अर्जुन ने क्या किया?॥2॥
 
When Dronacharya, endowed with immense self-confidence, entered the enemy's army after saying the above words to my son Duryodhana who had violated the orders of his teachers, what did Kunti's son Arjun do?॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)