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mahabharat 7.155.12: सुत! युद्ध से पीछे न हटने वाले इन कुन्तीपुत्रों के समूह में रात्रि में प्रकाश कैसे प्रकट हुआ और कौरवों के समूह में भी प्रकाश कैसे संभव हुआ?॥12॥   |   mahabharat अध्याय 7.155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.155.12 
कथमेषां तदा तत्र पार्थानामपलायिनाम्।
प्रकाशमभवद् रात्रौ कथं कुरुषु संजय॥ १२॥
 
 
अनुवाद
सुत! युद्ध से पीछे न हटने वाले इन कुन्तीपुत्रों के समूह में रात्रि में प्रकाश कैसे प्रकट हुआ और कौरवों के समूह में भी प्रकाश कैसे संभव हुआ?॥12॥
 
Sut! How did light appear in the night in the group of these sons of Kunti who did not retreat from the battle and how did light become possible in the group of Kauravas as well?॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)