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mahabharat 7.155.1: धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! जब अत्यंत तेजस्वी एवं वीर आचार्य द्रोण क्रोध और आक्रोश से भरे हुए संजयों की सेना में घुसे, उस समय तुम्हारी क्या मनोवृत्ति थी?   |   mahabharat अध्याय 7.155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 155: द्रोणाचार्यद्वारा शिबिका वध तथा भीमसेनद्वारा घूँसे और थप्पड़से कलिंगराजकुमारका एवं ध्रुव, जयरात तथा धृतराष्ट्रपुत्र दुष्कर्ण और दुर्मदका वध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.155.1 
धृतराष्ट्र उवाच
तस्मिन् प्रविष्टे दुर्धर्षे सृञ्जयानमितौजसि।
अमृष्यमाणे संरब्धे का वोऽभूद् वै मतिस्तदा॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! जब अत्यंत तेजस्वी एवं वीर आचार्य द्रोण क्रोध और आक्रोश से भरे हुए संजयों की सेना में घुसे, उस समय तुम्हारी क्या मनोवृत्ति थी?
 
Dhritarashtra asked- Sanjay! When the extremely brilliant and brave Acharya Drona entered the army of the Sanjayas filled with anger and resentment, what was your attitude at that time?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)