Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.154.5: मुझे लगता है दुश्मनों को बहुत देर से ठंड लगने लगी होगी, हालाँकि वह सही समय नहीं था। जैसे गायें सर्दी के मौसम में काँपती हैं, वैसे ही दुश्मन सैनिक भी गुरु के डर से काँपने लगे होंगे। | mahabharat अध्याय 7.154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन्ये तानस्पृशच्छीतमतिवेलमनार्तवम्।
मन्ये ते समवेपन्त गावो वै शिशिरे यथा॥ ५॥
अनुवाद
मुझे लगता है दुश्मनों को बहुत देर से ठंड लगने लगी होगी, हालाँकि वह सही समय नहीं था। जैसे गायें सर्दी के मौसम में काँपती हैं, वैसे ही दुश्मन सैनिक भी गुरु के डर से काँपने लगे होंगे।
I think the enemies must have started feeling cold for a long time even though it was not the right time. Just like cows shiver in the winter season, the enemy soldiers must have also started shivering in fear of the teacher.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥