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mahabharat 7.154.40-41: उस प्रातःकाल में अकेले द्रोणाचार्य ने अपने बाणों से एक हजार हाथी, दस हजार रथ तथा लाखों पैदल और घुड़सवारों को नष्ट कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार  »  श्लोक 40-41
 
 
श्लोक  7.154.40-41 
तानि नागसहस्राणि रथानामयुतानि च॥ ४०॥
पदातिहयसंघानां प्रयुतान्यर्बुदानि च।
द्रोणेनैकेन नाराचैर्निर्भिन्नानि निशामुखे॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उस प्रातःकाल में अकेले द्रोणाचार्य ने अपने बाणों से एक हजार हाथी, दस हजार रथ तथा लाखों पैदल और घुड़सवारों को नष्ट कर दिया।
 
In that morning dawn, Dronacharya alone destroyed one thousand elephants, ten thousand chariots and millions of infantry and horsemen with his arrows. 40-41.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि घटोत्कचवधपर्वणि रात्रियुद्धे चतुष्पञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत घटोत्कचवधपर्वमें रात्रियुद्धविषयक एक सौ चौवनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)