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mahabharat 7.154.4: वीर युद्धप्रिय सारथि आचार्य के पीछे कौन-कौन योद्धा खड़े थे और शत्रु पक्ष के कौन-कौन योद्धा उनके आगे खड़े थे? ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.154.4 
के चास्य पृष्ठतोऽन्वासन् वीरा वीरस्य योधिन:।
के पुरस्तादवर्तन्त रथिनस्तस्य शत्रव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वीर युद्धप्रिय सारथि आचार्य के पीछे कौन-कौन योद्धा खड़े थे और शत्रु पक्ष के कौन-कौन योद्धा उनके आगे खड़े थे? ॥4॥
 
Which warriors were standing behind the valiant war-loving charioteer Acharya and which warriors from the enemy side were standing in front of him? ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)