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mahabharat 7.154.31-32h: महाराज! रात्रि के समय कौरव सेना अपने बाजूबंद, कुण्डल, स्वर्ण हार और अस्त्र-शस्त्रों से जगमगा रही थी।   |   mahabharat अध्याय 7.154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.154.31-32h 
सा निशीथे महाराज सेनादृश्यत भारती॥ ३१॥
अङ्गदै: कुण्डलैर्निष्कै: शस्त्रैश्चैवावभासिता।
 
 
अनुवाद
महाराज! रात्रि के समय कौरव सेना अपने बाजूबंद, कुण्डल, स्वर्ण हार और अस्त्र-शस्त्रों से जगमगा रही थी।
 
Maharaj! At night the Kaurava army was shining with their armlets, earrings, golden necklaces and weapons. 31 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)