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mahabharat 7.154.30-31h: थोड़ी देर बाद वहाँ एक बहुत ही भयानक और रोंगटे खड़े कर देने वाली तेज़ आवाज़ गूँजी। ऐसा लगा मानो देवराज इंद्र का वज्र बज गया हो। वह आवाज़ वहाँ चारों दिशाओं में फैल गई थी।   |   mahabharat अध्याय 7.154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.154.30-31h 
तत्राभवन्महाशब्दस्तुमुलो लोमहर्षण:॥ ३०॥
समावृण्वन् दिश: सर्वा महेन्द्राशनिनि:स्वन:।
 
 
अनुवाद
थोड़ी देर बाद वहाँ एक बहुत ही भयानक और रोंगटे खड़े कर देने वाली तेज़ आवाज़ गूँजी। ऐसा लगा मानो देवराज इंद्र का वज्र बज गया हो। वह आवाज़ वहाँ चारों दिशाओं में फैल गई थी।
 
After a while, a very terrifying and loud sound that gave goosebumps reverberated there. It seemed as if the thunderbolt of Devraj Indra had spread. That sound had spread in all directions there. 30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)