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mahabharat 7.154.28-29h: हे भरतश्रेष्ठ! उस समय रात्रि के समय रत्नों और स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित कौरव सेना तारों से युक्त आकाश के समान शोभायमान हो रही थी।   |   mahabharat अध्याय 7.154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  7.154.28-29h 
तत: सा भारती सेना मणिहेमविभूषिता॥ २८॥
द्यौरिवासीत् सनक्षत्रा रजन्यां भरतर्षभ।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! उस समय रात्रि के समय रत्नों और स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित कौरव सेना तारों से युक्त आकाश के समान शोभायमान हो रही थी।
 
Bharatshrestha! At that time, during the night, the Kaurava army adorned with gems and gold ornaments looked as beautiful as the sky studded with stars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)