श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.154.27-28h 
भौमं रजोऽथ राजेन्द्र शोणितेन प्रणाशितम्॥ २७॥
शातकौम्भैश्च कवचैर्भूषणैश्च तमोऽभ्यगात्।
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! रक्त की धारा ने पृथ्वी की धूल को नष्ट कर दिया। स्वर्ण कवच और आभूषणों की चमक ने अंधकार को दूर कर दिया।
 
Rajendra! The stream of blood destroyed the dust of the earth. The shine of the golden armour and ornaments dispelled the darkness.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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