Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.154.25-26h: ढोल और मृदंगों की ध्वनि, झाँझ और डफों की ध्वनि, तथा हाथी और घोड़ों की हिनहिनाहट और हिनहिनाहट वहाँ सब कुछ व्याप्त हो गई थी॥25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.154.25-26h 
मृदङ्गानकनिर्ह्रादैर्झर्झरै: पटहैस्तथा॥ २५॥
फेत्कारैर्ह्रेषितै: शब्दै: सर्वमेवाकुलं बभौ।
 
 
अनुवाद
ढोल और मृदंगों की ध्वनि, झाँझ और डफों की ध्वनि, तथा हाथी और घोड़ों की हिनहिनाहट और हिनहिनाहट वहाँ सब कुछ व्याप्त हो गई थी॥25 1/2॥
 
The sound of the drums and mridangas, the sound of cymbals and tambourines, and the snorting and neighing of elephants and horses seemed to pervade everything there.॥25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)