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mahabharat 7.154.17-18h: उस अँधेरी रात में चारों ओर सियारें कोलाहल मचा रही थीं और अपने मुँह से आग उगल रही थीं, जिससे बड़े भय की सूचना मिल रही थी।   |   mahabharat अध्याय 7.154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 154: रात्रियुद्धमें पाण्डव-सैनिकोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण और द्रोणाचार्यद्वारा उनका संहार  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  7.154.17-18h 
तस्यां रजन्यां घोरायां नदन्त्य: सर्वत: शिवा:॥ १७॥
न्यवेदयन् भयं घोरं सज्वालकवलैर्मुखै:।
 
 
अनुवाद
उस अँधेरी रात में चारों ओर सियारें कोलाहल मचा रही थीं और अपने मुँह से आग उगल रही थीं, जिससे बड़े भय की सूचना मिल रही थी।
 
In that dark night the female jackals were making a hue and cry all around and were spitting fire from their mouths, giving information of great fear. 17 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)