Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.153.15-16h: जैसे किरणों से चमकते हुए मध्याह्न के समय सूर्य को कोई नहीं देख सकता, उसी प्रकार पाण्डव उस रणभूमि में सेना के मध्य में खड़े होकर अपने बाणों की ज्वालाओं से शत्रुओं को पीड़ा पहुँचाते हुए आपके पुत्र और अपने भाई दुर्योधन को नहीं देख सके॥15 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.153: कौरव-पाण्डव-सेनाका युद्ध, दुर्योधन और युधिष्ठिरका संग्राम तथा दुर्योधनकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा मध्यंदिने सूर्यं प्रतपन्तं गभस्तिभि:।
तथा तव सुतं मध्ये प्रतपन्तं शरार्चिभि:॥ १५॥
न शेकुर्भ्रातरं युद्धे पाण्डवा: समुदीक्षितुम्।
अनुवाद
जैसे किरणों से चमकते हुए मध्याह्न के समय सूर्य को कोई नहीं देख सकता, उसी प्रकार पाण्डव उस रणभूमि में सेना के मध्य में खड़े होकर अपने बाणों की ज्वालाओं से शत्रुओं को पीड़ा पहुँचाते हुए आपके पुत्र और अपने भाई दुर्योधन को नहीं देख सके॥15 1/2॥
Just as no one can look at the midday Sun blazing with its rays, similarly the Pandavas were unable to look at your son and their brother Duryodhana standing in the centre of the army, tormenting the enemies with the flames of their arrows, on that battlefield. ॥15 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥