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श्लोक  7.153.10 
शरा दश दिशो राजंस्तेषां मुक्ता: सहस्रश:।
न भ्राजन्ते यथातत्त्वं भास्करेऽस्तंगतेऽपि च॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! सूर्य के अस्त हो जाने के कारण उन योद्धाओं के छोड़े हुए हजारों बाण दसों दिशाओं में फैल नहीं पा रहे थे और न ही उनका प्रकाश हो पा रहा था।
 
O King! As the sun had set, the thousands of arrows shot by those warriors were not able to spread in all the ten directions and were not able to be illuminated properly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)