श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 152: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत तथा पुन: युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  7.152.6-7 
कथं नियच्छमानस्य द्रोणस्य युधि फाल्गुन:॥ ६॥
भिन्द्यात् सुदुर्भिदं व्यूहं यतमानोऽपि संयुगे।
प्रतिज्ञाया गत: पारं हत्वा सैन्धवमर्जुन:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यदि आचार्य द्रोण ने इस युद्ध में अर्जुन को रोकने का भरसक प्रयास किया होता, तो फिर वे युद्ध में उस अभेद्य व्यूह को चाहकर भी कैसे तोड़ पाते? सिंधुराज का वध करके अर्जुन अपनी प्रतिज्ञा के भार से मुक्त हो गए।
 
If Acharya Drona had tried his best to stop Arjun in this war, then how could he have broken that impenetrable array in the battle even if he had tried? By killing Sindhuraj, Arjun was freed from the burden of his vow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)