हे राजन! तत्पश्चात् आपकी कुमति के अनुसार आपके पुत्रों और शत्रुओं में घोर युद्ध छिड़ गया, जिसमें रथों का रथों से और हाथियों का हाथियों से युद्ध होने लगा।
O King! Thereafter, as per your bad advice, a fierce battle broke out between your sons and the enemies in which chariots clashed with chariots and elephants clashed with elephants.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि पुनर्युद्धारम्भे द्विपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें पुन: युद्धारम्भविषयक एक सौ बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५२॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल ४० श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)