श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 152: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत तथा पुन: युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.152.36 
तत: प्रववृते युद्धं व्यतिषक्तरथद्विपम्।
तावकानां परै: सार्धं राजन् दुर्मन्त्रिते तव॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तत्पश्चात् आपकी कुमति के अनुसार आपके पुत्रों और शत्रुओं में घोर युद्ध छिड़ गया, जिसमें रथों का रथों से और हाथियों का हाथियों से युद्ध होने लगा।
 
O King! Thereafter, as per your bad advice, a fierce battle broke out between your sons and the enemies in which chariots clashed with chariots and elephants clashed with elephants.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि पुनर्युद्धारम्भे द्विपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें पुन: युद्धारम्भविषयक एक सौ बावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५२॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल ४० श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)