श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 152: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत तथा पुन: युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.152.30 
युध्यस्व यत्नमास्थाय दैवं कृत्वा निरर्थकम्।
यततस्तव तेषां च दैवं मार्गेण यास्यति॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
फिर भी तुम भाग्य को व्यर्थ समझकर पूरे प्रयत्न से युद्ध करो। जब तक तुम और पाण्डव अपनी-अपनी विजय के लिए प्रयत्न करते रहोगे, भाग्य अपने लक्ष्य से भटकता ही रहेगा ॥30॥
 
Even then you should consider fate to be futile and fight with full effort. While you and the Pandavas keep trying for your respective victory, fate will keep going away from its destination. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)