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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 152: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत तथा पुन: युद्धका आरम्भ
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श्लोक 26
श्लोक
7.152.26
दैवोपसृष्ट: पुरुषो यत् कर्म कुरुते क्वचित्।
कृतं कृतं हि तत्कर्म दैवेन विनिपात्यते॥ २६॥
अनुवाद
भाग्य या दुर्भाग्य से ग्रस्त मनुष्य जो भी कर्म करता है, भाग्य उसके हर कर्म को उलट देता है ॥26॥
Whatever deeds a man who is struck by fate or misfortune does, fate reverses every deed of his. ॥26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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