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mahabharat 7.152.17-19: अर्जुन शस्त्रविद्या के ज्ञाता, कुशल, यौवन से संपन्न, पराक्रमी, अनेक दिव्य अस्त्रों के ज्ञाता और शीघ्र ही अपना पराक्रम प्रदर्शित करने वाले थे। वे दिव्य अस्त्रों से सुसज्जित और वानर ध्वज से सुशोभित रथ पर आसीन थे। श्रीकृष्ण ने उनके घोड़ों की लगाम संभाल रखी थी। वे अभेद्य कवच से सुरक्षित थे। उन्हें अपने बाहुबल पर गर्व था। ऐसी स्थिति में, यदि पराक्रमी अर्जुन ने कभी न थकने वाले दिव्य गांडीव धनुष को धारण करके और तीखे बाणों की वर्षा करते हुए आचार्य द्रोण को लांघा, तो यह उनके योग्य ही था।   |   mahabharat अध्याय 7.152: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत तथा पुन: युद्धका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 152: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत तथा पुन: युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 17-19
 
 
श्लोक  7.152.17-19 
कृती दक्षो युवा शूर: कृतास्त्रो लघुविक्रम:।
दिव्यास्त्रयुक्तमास्थाय रथं वानरलक्षणम्॥ १७॥
कृष्णेन च गृहीताश्वमभेद्यकवचावृत:।
गाण्डीवमजरं दिव्यं धनुरादाय वीर्यवान्॥ १८॥
प्रवर्षन् निशितान् बाणान् बाहुद्रविणदर्पित:।
यदर्जुनोऽभ्ययाद् द्रोणमुपपन्नं हि तस्य तत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन शस्त्रविद्या के ज्ञाता, कुशल, यौवन से संपन्न, पराक्रमी, अनेक दिव्य अस्त्रों के ज्ञाता और शीघ्र ही अपना पराक्रम प्रदर्शित करने वाले थे। वे दिव्य अस्त्रों से सुसज्जित और वानर ध्वज से सुशोभित रथ पर आसीन थे। श्रीकृष्ण ने उनके घोड़ों की लगाम संभाल रखी थी। वे अभेद्य कवच से सुरक्षित थे। उन्हें अपने बाहुबल पर गर्व था। ऐसी स्थिति में, यदि पराक्रमी अर्जुन ने कभी न थकने वाले दिव्य गांडीव धनुष को धारण करके और तीखे बाणों की वर्षा करते हुए आचार्य द्रोण को लांघा, तो यह उनके योग्य ही था।
 
Arjuna was a scholar of the art of weapons, skilled, blessed with youth, valiant, knowledgeable of many divine weapons and quick to display his prowess. He was seated on a chariot adorned with divine weapons and adorned with the monkey flag. Shri Krishna had taken the reins of his horses. He was protected by an impenetrable armour. He was proud of his physical strength. In such a situation, if the valiant Arjuna, carrying the divine Gandiva bow which never wears out, and showering sharp arrows, crossed Acharya Drona, then it was a deed worthy of him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)