श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 152: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत तथा पुन: युद्धका आरम्भ  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.152.15 
कर्ण उवाच
आचार्यं मा विगर्हस्व शक्तॺासौ युध्यते द्विज:।
यथाबलं यथोत्साहं त्यक्त्वा जीवितमात्मन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा- भैया! अपने गुरु की निन्दा मत करो। वह ब्राह्मण अपने बल, पराक्रम और उत्साह के अनुसार, प्राणों की भी परवाह न करते हुए, युद्ध लड़ता है।
 
Karna said- Brother! Do not criticize your teacher. That Brahmin fights the battle according to his strength, power and enthusiasm, even without caring for his life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)