Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.152.10: शत्रुसूदन! परंतु अर्जुन तो महामना आचार्य द्रोण को सदैव ही अत्यन्त प्रिय रहा है। इसीलिए उन्होंने उसे बिना युद्ध किए ही सेना में प्रवेश करने का मार्ग प्रदान किया॥10॥ | mahabharat अध्याय 7.152: दुर्योधन और कर्णकी बातचीत तथा पुन: युद्धका आरम्भ । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रुसूदन! परंतु अर्जुन तो महामना आचार्य द्रोण को सदैव ही अत्यन्त प्रिय रहा है। इसीलिए उन्होंने उसे बिना युद्ध किए ही सेना में प्रवेश करने का मार्ग प्रदान किया॥10॥
Shatrusudan! But Arjun has always been very dear to the great Acharya Drona. That is why he gave him the way to enter the formation without fighting.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥