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mahabharat 7.151.9: जिन पराक्रमी भीष्म को हम तीनों लोकों के पुरुषों में सबसे अधिक पराक्रमी मानते थे, उनके मर जाने पर हम दूसरों पर कैसे विश्वास कर सकते हैं? ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 7.151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.151.9 
यं पुंसां त्रिषु लोकेषु सर्वशूरममंस्महि।
तस्मिन् निपतिते शूरे किं शेषं पर्युपास्महे॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जिन पराक्रमी भीष्म को हम तीनों लोकों के पुरुषों में सबसे अधिक पराक्रमी मानते थे, उनके मर जाने पर हम दूसरों पर कैसे विश्वास कर सकते हैं? ॥9॥
 
How can we trust others after the death of the valiant Bhishma, who we considered the most valiant among the men of the three worlds? ॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)