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mahabharat 7.151.8: जब मैंने देवताओं और दानवों के लिए भी अजेय रहे वीरों को युद्ध में मारा जाता देखा, तब उसी क्षण मैंने जान लिया कि कौरव सेना अब और नहीं बचेगी ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.151.8 
अवध्यं निहतं दृष्ट्वा संयुगे देवदानवै:।
तदैवाज्ञासिषमहं नेयमस्तीति भारती॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब मैंने देवताओं और दानवों के लिए भी अजेय रहे वीरों को युद्ध में मारा जाता देखा, तब उसी क्षण मैंने जान लिया कि कौरव सेना अब और नहीं बचेगी ॥8॥
 
When I saw those who were invincible even for gods and demons, being killed in the war, I knew at that very moment that the Kaurava army would not survive any more. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)