Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.151.41: जिस प्रकार सूर्य तारों का तेज हर लेता है, उसी प्रकार आचार्य द्रोण क्षत्रियों का तेज हर लेते हैं। दुर्योधन से उपर्युक्त वचन कहकर वे पाण्डवों और सृंजयों से युद्ध करने के लिए आगे बढ़े। | mahabharat अध्याय 7.151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिस प्रकार सूर्य तारों का तेज हर लेता है, उसी प्रकार आचार्य द्रोण क्षत्रियों का तेज हर लेते हैं। दुर्योधन से उपर्युक्त वचन कहकर वे पाण्डवों और सृंजयों से युद्ध करने के लिए आगे बढ़े।
Just as the Sun takes away the brilliance of the stars, in the same way Acharya Drona takes away the brilliance of the Kshatriyas. After saying the above words to Duryodhan, he proceeded to fight with the Pandavas and the Srinjayas.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि द्रोणवाक्ये एकपञ्चाशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १५१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें द्रोणवाक्यविषयक एक सौ इक्यावनवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥