चक्षुर्मनोभ्यां संतोष्या विप्रा: पूज्याश्च शक्तित:।
न चैषां विप्रियं कार्यं ते हि वह्निशिखोपमा:॥ ३८॥
अनुवाद
नम्र दृष्टि और भक्तियुक्त हृदय से ब्राह्मणों को प्रसन्न रखो, यथाशक्ति उनका आदर करते रहो, उन्हें कभी अप्रसन्न मत करो; क्योंकि वे अग्नि की ज्वाला के समान तेजस्वी हैं॥ 38॥
‘Keep the brahmins happy with a humble look and a devoted heart, keep honoring them as much as you can. Never displease them; because they are as radiant as the flames of fire.’॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥