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mahabharat 7.151.37: तुम धर्म, अर्थ और काम के साधनों में कुशल हो, अतः धर्म और अर्थ की चिन्ता न करके बारम्बार धर्म के कर्म करो॥ 37॥   |   mahabharat अध्याय 7.151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.151.37 
धर्मार्थकामकुशलो धर्मार्थावप्यपीडयन्।
धर्मप्रधानकार्याणि कुर्याश्चेति पुन: पुन:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तुम धर्म, अर्थ और काम के साधनों में कुशल हो, अतः धर्म और अर्थ की चिन्ता न करके बारम्बार धर्म के कर्म करो॥ 37॥
 
‘You are skilled in the means of Dharma, Artha and Kama. Therefore, without bothering about Dharma and Artha, repeatedly perform the deeds of Dharma.॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)