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mahabharat 7.151.27: हे भारत! ऐसी स्थिति में जब आप स्वयं सिन्धुराज की रक्षा करने में असमर्थ हैं, तब मुझे अपने शब्दबाणों से क्यों बींध रहे हैं? मैं स्वयं व्याकुल हो रहा हूँ॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 7.151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.151.27 
तन्मां किमभितप्यन्तं वाक्शरैरेव कृन्तसि।
अशक्त: सिन्धुराजस्य भूत्वा त्राणाय भारत॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! ऐसी स्थिति में जब आप स्वयं सिन्धुराज की रक्षा करने में असमर्थ हैं, तब मुझे अपने शब्दबाणों से क्यों बींध रहे हैं? मैं स्वयं व्याकुल हो रहा हूँ॥ 27॥
 
O Bharata! In such a situation, when you yourself are unable to protect the King of Sindhus, why are you piercing me with your verbal arrows? I myself am getting agitated.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)