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mahabharat 7.151.26: धृष्टद्युम्न और शिखण्डी सहित समस्त पांचालों को मारने के स्थान पर मैं स्वयं को धृष्टद्युम्न के पापमय संकल्प में डूबता हुआ देखता हूँ॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 7.151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.151.26 
मज्जन्तमिव चात्मानं धृष्टद्युम्नस्य किल्बिषे।
पश्याम्यहत्वा पञ्चालान् सह तेन शिखण्डिना॥ २६॥
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न और शिखण्डी सहित समस्त पांचालों को मारने के स्थान पर मैं स्वयं को धृष्टद्युम्न के पापमय संकल्प में डूबता हुआ देखता हूँ॥ 26॥
 
Instead of killing all the Panchalas including Dhrishtadyumna and Shikhandi, I see myself drowning in the sinful resolve of Dhrishtadyumna.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)