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mahabharat 7.151.14: जो मूर्ख अपने हितैषी मित्रों के हितकर वचनों की उपेक्षा करके मनमाना आचरण करता है, वह थोड़े ही समय में दयनीय स्थिति को प्राप्त हो जाता है ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 7.151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.151.14 
योऽवमन्य वच: पथ्यं सुहृदामाप्तकारिणाम्।
स्वमतं कुरुते मूढ: स शोच्यो नचिरादिव॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख अपने हितैषी मित्रों के हितकर वचनों की उपेक्षा करके मनमाना आचरण करता है, वह थोड़े ही समय में दयनीय स्थिति को प्राप्त हो जाता है ॥14॥
 
A fool who disregards the beneficial words of his well-wishing friends and behaves arbitrarily, reaches a pitiable condition in a short time. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)