Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.151.12-13: दुर्योधन! विदुर जी धैर्यवान और महापुरुष हैं। उन्होंने तुम्हारे कल्याण के लिए शुभ वचन कहे थे, किन्तु तुमने विजय के हर्ष में उनकी उपेक्षा कर दी। उनके वचनों का अनादर करने के कारण ही तुम्हें यह भयंकर संहार प्राप्त हुआ है॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 7.151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  7.151.12-13 
यास्ता विजयतश्चापि विदुरस्य महात्मन:।
धीरस्य वाचो नाश्रौषी: क्षेमाय वदत: शिवा:॥ १२॥
तदिदं वर्तते घोरमागतं वैशसं महत्।
तस्यावमानाद् वाक्यस्य दुर्योधन कृते तव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन! विदुर जी धैर्यवान और महापुरुष हैं। उन्होंने तुम्हारे कल्याण के लिए शुभ वचन कहे थे, किन्तु तुमने विजय के हर्ष में उनकी उपेक्षा कर दी। उनके वचनों का अनादर करने के कारण ही तुम्हें यह भयंकर संहार प्राप्त हुआ है॥12-13॥
 
Duryodhan! Vidur ji is a patient and great man. He had spoken auspicious words for your welfare and you ignored them in the joy of victory. Because of disrespecting his words, you have received this terrible massacre.॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)