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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.151.11 
त एते घ्नन्ति नस्तात विशिखा: पार्थचोदिता:।
तांस्तदाऽऽख्यायमानस्त्वं विदुरेण न बुद्धवान्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
परन्तु पुत्र! उस समय विदुरजी ने जो कुछ कहा था, वह तुमने कुछ भी नहीं समझा। पिताजी! वे ही पासे अर्जुन के चलाए हुए बाण बन गए हैं और हमें मार रहे हैं।
 
But son! You did not understand anything of what Vidurji said at that time. Father! Those very dice have become the arrows shot by Arjun and are killing us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)