Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.150.4-5: माननीय राजा! उन्हें विश्वास हो गया कि 'इस पृथ्वी पर अर्जुन के समान कोई दूसरा योद्धा नहीं है। रणभूमि में क्रोधित अर्जुन के सामने न तो द्रोण, न कर्ण, न अश्वत्थामा, न कृपाचार्य ही टिक सकते हैं।' 4-5॥ | mahabharat अध्याय 7.150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अमन्यतार्जुनसमो न योद्धा भुवि विद्यते॥ ४॥
न द्रोणो न च राधेयो नाश्वत्थामा कृपो न च।
क्रुद्धस्य समरे स्थातुं पर्याप्ता इति मारिष॥ ५॥
अनुवाद
माननीय राजा! उन्हें विश्वास हो गया कि 'इस पृथ्वी पर अर्जुन के समान कोई दूसरा योद्धा नहीं है। रणभूमि में क्रोधित अर्जुन के सामने न तो द्रोण, न कर्ण, न अश्वत्थामा, न कृपाचार्य ही टिक सकते हैं।' 4-5॥
Honorable King! He was convinced that 'there is no other warrior like Arjun on this earth. Neither Drona, nor Karna, nor Ashwatthama, nor Kripacharya can stand before the enraged Arjuna in the battle of battle. 4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥