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mahabharat 7.150.30: युद्धभूमि में अपने वचन के प्रति निष्ठावान भीष्म ने स्वयं ही मृत्यु को स्वीकार कर लिया और आप हमारी उपेक्षा कर रहे हैं, क्योंकि अर्जुन आपका प्रिय शिष्य है।   |   mahabharat अध्याय 7.150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 150: व्याकुल हुए दुर्योधनका खेद प्रकट करते हुए द्रोणाचार्यको उपालम्भ देना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.150.30 
स्वयं हि मृत्युर्विहित: सत्यसंधेन संयुगे।
भवानुपेक्षां कुरुते शिष्यत्वादर्जुनस्य हि॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में अपने वचन के प्रति निष्ठावान भीष्म ने स्वयं ही मृत्यु को स्वीकार कर लिया और आप हमारी उपेक्षा कर रहे हैं, क्योंकि अर्जुन आपका प्रिय शिष्य है।
 
On the battlefield, Bhishma, who was faithful to his word, accepted his death himself, and you are ignoring us because Arjuna is your favourite disciple.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)